कोचिंग कोटा के विद्यार्थियों के मन से

मधुसूदन गौतम

रचनाकार- मधुसूदन गौतम

विधा- गीत

* विद्यार्थी व्यथा *

*******हाडौती में गीत*******

अरी एरी बता, कद आवगी, मन म साता ।

पडबा लिखबा म ही बीत, जोबन की राता।

पन्द्रह साल की उम्रिया म ,
जोबन दस्तक दीन्ही ।
सर प आई बोर्ड परीक्षा,
निन्दां म्हारी छीनी।
अब तो बस पढाई ही
पीता और खाता।

री भाईली कद आवगी
जीवन म साता। पढबा…….

हलो पिताजी हाय माताजी
हाय भाई भोज़ाई
मलबो जुलबो दूसर हो ग्यो
सासरा क नाई।
भूल गई ऋ मूं सगा सम्बन्धी
रिश्ता और नाता।
री भाइली…….

कोचिंग छुट कोलेज म आई,
थोड़ी मस्ती छाई।
जिण साजन न देख्यो कोणी,
वांकी ओल्यु आई।
अब तो लाग दन बरस
ऒर लम्बी लाग राता।

ऋ भाइलि
कद आव्गी जीवन म साता…….
.
***-* मधु गौतम

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मधुसूदन गौतम
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मुझे नियमो में बंधना नही भाता ।वो बात अलग है मैं नियमो से लिखता हूँ भी।
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