कोई तो है मैरा

शक्ति राव मणि

रचनाकार- शक्ति राव मणि

विधा- कविता

जब लगा की कोई नही है मेरा
तब उठा और देखा
वो तारा भी मेरा,और चाँद भी मेरा
तु उठी सुबह धूप भी तेरी और आकाश का सूरज भी तेरा.

संभावनाओ मे जीवन कट रहा है
कि कोई तो हो मेरा
बस फिर एक नजर मिली उनसे और लगने लगा कोई तो है मेरा
यकीन हे हमको देखती तो तुम भी हो हमे, पर क्या बात है जो कहती नही हमे.

सब कुछ है मेरा
वो धूप भी मेरी और आकाश का सूरज भी मेरा
हो जाती हूँ रात मे तन्हा
कि कोई नही अब मेरा
पर तेरी तरह ना-समझ नही
ओ-पागल! वो रात भी तेरी और रात का अंधेरा भी तेरा
वो चाँद तेरा और उस पर सूरज मेरा
अकेला न समझ खुद को
मैै डूबकर दिन खत्म करती हूँ
क्योंकि रात तेरी ओर वो निकलने वाला तारा तेरा
अब तो न बोल
कि कोई नही है मेरा.

अब समझा मै
तु डूबे तो मै हुँ रात
मै डुबूँ तो तू है दिन
मिलना मुश्किल है
पर सवेरा हूँ मै तैरा
और तू शाम है मैरी

अब लगता है
कोई तो है मैरा
वो चाँद तैरा और सूरज मेरा………

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