कोई आज ..कोई चार दिन बाद

NIRA Rani

रचनाकार- NIRA Rani

विधा- कविता

जिंदगी जितनी गुजरी है कुछ कमाने मे
उससे कहीं ज्यादा गुजरी है बहुत कुछ गवॉने मे

खून के रिश्ते जो बहुत प्यारे थे
जिंदगी जीने के सहारे थे
वो बेवक्त खुदा को भी प्यारे हो गए
जो कभी हमारे साथ थे
वो आज खुदा के पास हो गए ..

जिंदगी से तो डटकर मुकाबला कर ले
पर गर मौत ही गले लगा ले
तो इंसॉ किसपे भरोसा कर ले
सच ही तो है ..

पल की खबर नही
बरसों को संजोया है ….

कब जिंदगी का दामन छूट जाए
कब मौत की आगोश मे डूब जाए ..
वक्त की तलवार सबके सिर पर लटक रही
कोई आज ..कोई चार दिन बाद …..
अटल सच्चाई ..

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NIRA Rani
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साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..

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