कैसे सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा है?

Dr. pragy Goel

रचनाकार- Dr. pragy Goel

विधा- कविता

जिस देश का कानून खड़ा है जैसे हो अंधा
और पुलिस थानो में हो जैसे पंडो का धंधा
मुठभेड़ो के नाम पर हत्या होती है निर्दोषों की
चौराहे पर चीरहरण आदत है बाहुबलियों की
जहां वर्दीयो की बाहों में अबला की चीखें गुम हैं
पुरूषोत्तम क देश में मर्यादा तो बस एक भ्रम है
गांधी क सपनो का भारत,कातिल है,हत्यारा है
कैसे सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा है
गर्मी सरदी बरसातो में निर्धन मर जाये तो क्या
अामो की गुठली रे आटें की रोटी खाये तो क्या
आदिवासी भूखे नंगे पेड़ों की कोपल खाये
पगडंडी पर पैदा होकर फुटपाथों पर मर जाये
झोपड़ी के आंगन में भूख बिलखती देखी है
दो रोटी के खातिर इज्जत बिकते देखी है
भूखो से जो भीख मांग ले भारत वो बंजारा है
कैसे सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा है
खूनी कौमी दंगों के जंगल है जिसके आँगन में
जल जाते हैं लोग घर सहित और घर ढह जाते सावन में
इसके पूजाघर में शामिल होड मची हथियारों की
ईटे रोया करती जिलको मंदिर मस्जिद गुरूद्वारो की
इंसानो के सौदे करते हैं कुर्सी वाले और धनवान
सौदो की जो बलि चढ गये वो अब भी अनजान
राष्ट्रभक्तो की भूमि पर ये खालिस्तानी नारा है
कैसे सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा है
भारत माँ सिसके चिल्लाये "मेरा बेटा कौन है"
"मैं हू माँ" की गूंज उठे पर भारत क्यूँ मौन है
खून गरम क्या होगा इनका ये लाशो का श्मशान है माँ
मातृभूमि का नाम पे भी निजस्वार्थ यहां की मांग है माँ
झंडे के कपड़े से थैला सिलवाता देश हमारा है
भला किसी को क्या मतलब पर अपना मतलब प्यारा है
जाति पंथ के नाम पे बस भारत एक बँटवारा है
फिर कैसे सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा है?

Views 182
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Dr. pragy Goel
Posts 4
Total Views 252
देह शब्द है भाव आत्मा यही समुच्चय मेरा परिचय

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia