कैसे कहुँ

कवि कृष्णा बेदर्दी

रचनाकार- कवि कृष्णा बेदर्दी

विधा- गीत

तुमसे मुहब्बत है मेरे सनम , ये कहने की बात नही,
जरा नजरो से समझा करो
तुम रूह में समाये हो मेरी किस कदर ये कैसे कहुँ,
जरा नजरो से समझा करो
तुझ बिन कटते नही मेरे रात और दिन कैसे कहूँ ,
जरा नजरो से समझा करो
तुम मेरी इबादत हो दुआ हो इस दिल की कैसे कहूँ,
जरा नजरो से समझा करो
तू बस गया है मुझमे रब की तरह सनम कैसे कहूँ
जरा नजरो से समझा करो
मुझे जरुरत है जिस दिलो सुकून की ,वो तुम हो कैसे कहूँ,
जरा नजरो से समझा करो
जीती हूँ मरती हूँ बस तेरी मुहब्बत में , कैसे कहूँ
जरा नजरो से समझा करो
तुम मेरी जरूरत मेरी जिंदगी हो , कैसे कहूँ
जरा नजरो से समझा करो
तुम हो तो मै हूँ , तुम नही तो मै भी नही कैसे कहुँ
जरा नजरो से समझा करो
ओ सनम मेरे हमदम मेरी जिंदगी मेरी मेरा हर लम्हा मेरा सुख दुःख बस तू ही हैं तू ही है एक तू ही तो है

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कवि कृष्णा बेदर्दी
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कवि कृष्णा बेदर्दी ( डाक्टर) जन्मतिथि-०७/०७/१९८८ जन्मस्थान- मधुराई (तमिलनाडु) शिक्षा मैट्रिक -विलेपार्ले(मुम्बई) शिक्षा मेडिकल - B.A.M.S.(लन्दन) प्रकाशित पुस्तक- हिन्दी_हमराही,अनुभूति,महक मुसाफिर, तेलुगु, हिन्दी-तेलुगू फिल्मों में गीतकार शौक_ डांस,अभिनय,गिटार,लेखन, नम्बर- +918319898597 Email I'd kavibedardi@gmail.com, Facebook link https://m.facebook.com/Bedardi? Twitter_@kavibedardi

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