कृपान घनाक्षरी

guru saxena

रचनाकार- guru saxena

विधा- घनाक्षरी

कृपान घनाक्षरी
बैरी आज सीना तान करे जंग का ऐलान,
ओ सपूतो सावधान,आन-बान जा न पाय।
माता भारती का मान,वीरो राखो देके प्रान,
ललकारो प्रण ठान,शत्रु बच के न जाए।
छत्रसाल के समान,चले झूमके कृपान
वैसा धारो स्वाभिमान,काल देख के डराय।
रिपु का मिटे गुमान,नभ गूंजे राष्ट्रगान,
अरिदल के निशान,पै तिरंगा फहराय।।

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