कुर्सियाँ अपनी लेकर किधर जाएंगे

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गज़ल/गीतिका

कुर्सियाँ अपनी लेकर किधर जाएंगे
ये तो नेता हैं खुद ही उतर जायेंगे

देखना वोट पाने को नेता यहां
अब दिलों में जहर कितना भर जाएंगे

बात घर की सड़क पर ले आये हो जब
सब तमाशा ही अब देखकर जाएंगे

देश पर आंच आने न देंगे कभी
जान हम अपनी कुर्बान कर जाएंगे

रेशमी डोर में रिश्तों के मोती हैं
खींचने से ये मोती बिखर जायेंगे

रुष्ट हो जाएगी अपनी कुदरत बहुत
काटे धरती के जब भी शजर जाएंगे

नफरतों के सिवा कुछ मिला ही नहीं
प्यार पाया तो हम भी सँवर जायेगे

आप ही आप आएंगे हमको नज़र
'अर्चना' देखिये हम जिधर जाएंगे

डॉ अर्चना गुप्ता
08-09-2017

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

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