कुर्बानी!

Neeraj Chauhan

रचनाकार- Neeraj Chauhan

विधा- कविता

ये कैसा त्यौहार?
धर्म के नाम पर,
मासूमों की
गर्दनों पर वार।

ये कैसा त्यौहार?
जहाँ सब गलत है सही,
कुर्बानी के नाम पर
ख़ून की नदी बही।

ये कैसा त्यौहार?
सिर्फ मनुष्यों का मल्हार,
मगर हर तरफ है गूंजती
जानवरों की चित्कार।

ये कैसा त्यौहार?
जहा हिंसा ही धर्म हो गया,
बहा सड़कों पे लहू
इंसा बेशर्म हो गया।

ये कैसा त्यौहार?
जहा क़ुरबानी बुराइयों की नहीं,
बेजुबानों की गर्दनें उड़ाने में
सबकी खुशियां रही।

क़ुरबानी अहंकार की हो,
कुरान लिखता हैं
क़ुरबानी अत्याचार की हो,
कुरान लिखता है
क़ुरबानी बुराइयों की हो,
कुरान लिखता हैं
जीत अच्छाइयों की हो
कुरान लिखता है।

– नीरज चौहान
(जीव मात्र को जीने का अधिकार है, इस उद्देश्य से प्रेरित होकर येे कविता लिखी हैं। इसे भड़काऊ ना बनाये। सर्वधर्म समभाव बनाये रखे। सबको जीने दे।)

Sponsored
Views 53
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Neeraj Chauhan
Posts 61
Total Views 7k
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia