कुण्डलियाँ

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- कुण्डलिया

कुण्डलियाँ छंद
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नफ़रत का अब घुल गया, धुआँ अनिल में आज।
प्रेम मिटा कर हो गया, गंदा आज समाज।।
गंदा आज समाज,घर- घर हुए आतंकी।
कानून करता है, जनता संग नौटंकी ।
कह "प्रीतम कविराय, देखिए बिगडे़ हैं सब।
बजता डंका चहुँ ओर यहाँ, नफ़रत का अब ।।

प्रीतम राठौर भिनगाई
श्रावस्ती (उ०प्र०)

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Pritam Rathaur
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मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

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