कुण्डलियाँ (बाबा राम रहीम)

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- कुण्डलिया

सत्तसंग के आंड़ में, करते थे व्यभिचार ।
दिन में गुरू बन कर रहें, रात बनें दिलदार ।।

रात बने दिलदार,करें सुरा सुंदरी भोग ।
जन-जन को ठग रहे, सिखला कर ये जोग।

कह "प्रीतम" कविराय, जेल न भेजो इनको ।
जनता करे पुकार, आज दो फाँसी इसको ।।

प्रीतम राठौर भिनगाई
श्रावस्ती (उ०प्र०)

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Pritam Rathaur
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मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

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