कुटिल इन्सान कब होता कुटिल तो चाल होती है

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- मुक्तक

कुटिल इन्सान कब होता कुटिल तो चाल होती है
बुराई देखकर इंसानियत बे हाल होती है
करो तुम नेह की बर्षा पिघल जाये कुटिल मन भी
भरा हो नेह दिल में तो मनुजता ढाल होती है
डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

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2 comments
  1. बिल्कुल सही अर्चना जी, ,इन्सान कुटिल नही होता,,बल्कि पैदा होने के बाद उसके अन्दर सारी प्रवृत्तिया इस संसार ओर संसारी लोगों से आती है ओर व्यक्ति के विवेक, प्रवृत्ति, ओर बोद्धिक. सामर्थ्य. के हिसाब से उसके चित मे बनती बिगडति रहती है इसीलिए. बुद्धिजनो को अपने विवेक के साथ समाज उत्थान-मे आगे आना चाहिए