कुछ शब्द ~१४

कमलेश यादव

रचनाकार- कमलेश यादव

विधा- शेर

(1)
तेरे प्यार में मौक़ूफ़ बैठे थे आँख बंद किये
आँख खोली तो ख़ुद को बहुत तनहा पाया

*मौक़ूफ़= dependent, निर्भर

(2)

तुम आये ऐसे कि कभी गए ही नहीं
तुम गए ऐसे कि कभी आये ही नहीं

(3)

बहता-बहता पानी बहे जा रहा है
बीता-बीता लम्हा बीता जा रहा है

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कमलेश यादव
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जन्म:- लोरमी,छत्तीसगढ़(भारत) शिक्षा- नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नॉलजी रायपुर, छत्तीसगढ़ से कम्प्यूटर टेक्नॉलजी में स्नातकोत्तर। सम्राट अशोक टेक्नॉलजी कॉलेज विदिशा (म प्र) से कम्प्यूटर साइंस में स्नातक। स्थान- न्यूयॉर्क, यूएसए कार्यक्षेत्र- ९ वर्ष तक कालेज अध्यापन अब स्वतंत्र लेखन। ब्लाग लेखन। गीत, गजल, दोहे, सवैया, हाइकु,छंदमुक्त, कहानी और व्यंग्य विधाओं में सक्रिय। कृतियाँ- कविता संग्रह- अब मैं मन का करतीं हुँ चलो फिर एक बार कुछ बचा है हमारे बीच दिन

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