कुछ शब्द~५

कमलेश यादव

रचनाकार- कमलेश यादव

विधा- शेर

(१)

एक चाह थी फलक की कभी
वो तवक़्क़ो अभी भी बाक़ी हैं।

(२)
‪चराग ने कहा तीरग़ी से‬
मेरे उम्र पर मत जा,
जब तक जलूँगा
लोग मुझे ही देखेंगे।

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कमलेश यादव
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जन्म:- लोरमी,छत्तीसगढ़(भारत) शिक्षा- नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नॉलजी रायपुर, छत्तीसगढ़ से कम्प्यूटर टेक्नॉलजी में स्नातकोत्तर। सम्राट अशोक टेक्नॉलजी कॉलेज विदिशा (म प्र) से कम्प्यूटर साइंस में स्नातक। स्थान- न्यूयॉर्क, यूएसए कार्यक्षेत्र- ९ वर्ष तक कालेज अध्यापन अब स्वतंत्र लेखन। ब्लाग लेखन। गीत, गजल, दोहे, सवैया, हाइकु,छंदमुक्त, कहानी और व्यंग्य विधाओं में सक्रिय। कृतियाँ- कविता संग्रह- अब मैं मन का करतीं हुँ चलो फिर एक बार कुछ बचा है हमारे बीच दिन

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