कुछ शब्दों में

कमलेश यादव

रचनाकार- कमलेश यादव

विधा- मुक्तक

(१)
जाने कौन सा किरदार निभाने को आए
कब जाने जीवन की शाम हो जाए
कुछ पल रुक जाओ वो चलने वालो
सोचो-समझो की आख़िर क्यूँ आए?

(२)
जैसे चिड़िया लौट आती है अपने घोंसले में
जैसे चींटी लौट आती है अपने बिलो में
जैसे बस लौट आती है वापिस अपने स्टेशन तक
वैसे ही मैं भी लौट आता हुँ आख़िर में तुम तक

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कमलेश यादव
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जन्म:- लोरमी,छत्तीसगढ़(भारत) शिक्षा- नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नॉलजी रायपुर, छत्तीसगढ़ से कम्प्यूटर टेक्नॉलजी में स्नातकोत्तर। सम्राट अशोक टेक्नॉलजी कॉलेज विदिशा (म प्र) से कम्प्यूटर साइंस में स्नातक। स्थान- न्यूयॉर्क, यूएसए कार्यक्षेत्र- ९ वर्ष तक कालेज अध्यापन अब स्वतंत्र लेखन। ब्लाग लेखन। गीत, गजल, दोहे, सवैया, छंदमुक्त, कहानी और व्यंग्य विधाओं में सक्रिय। कृतियाँ- कविता संग्रह- अब मैं मन का करतीं हुँ चलो फिर एक बार कुछ बचा है हमारे बीच दिन
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