कुछ परिभाषाएँ…!

maheshjain jyoti

रचनाकार- maheshjain jyoti

विधा- अन्य

कसम
—-
बातों की श्रंखला में
विश्वास की चेष्टा
और झूँठ की पराकाष्ठा को
'कसम' कहते हैं ।

कदम
—-
समीप से सुदूर तक
सुदूर से समीप तक
जाने और आने के माप को
'कदम' कहते हैं ।

करम
—-
कल और कल के
मध्य में भटकते
आज के भूत और भविष्य को
'करम' कहते हैं ।

कलम
—-
अंकित कर लेती जो
बहकते विचारों को
उस भोजपत्र की प्रेमिका को
'कलम कहते हैं ।
—-
– महेश जैन 'ज्योति '

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maheshjain jyoti
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"जीवन जैसे ज्योति जले " के भाव को मन में बसाये एक बंजारा सा हूँ जो सत्य की खोज में चला जा रहा है अपने लक्ष्य की ओर , गीत गाते हुए, कविता कहते और छंद की उपासना करते हुए । कविता मेरा जीवन है, गीत मेरी साँसें और छंद मेरी आत्मा । -'ज्योति'

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