कुछ दोहे

Hema Tiwari Bhatt

रचनाकार- Hema Tiwari Bhatt

विधा- दोहे

💐💐💐कुछ दोहे💐💐💐

एक जैसे भावों की,नकल टीपतेे लोग|
फेसबुकी कविता हुई,ज्यों संक्रामक रोग||1||

निराला औ' दिनकर सी,ढूँढ़ कलम मत आज|
अंगूठे से लिख रहा,ज्ञानी हुआ समाज||2||

तुलसी सूर कबीर हों,सबकी कहाँ बिसात|
करें कठिन बस साधना,हृदय लिये जज्बात||3||

रमा रजिया संग करें,हँसी खुशी हर काम|
कौन हँसी की जात है,क्या मजहब का नाम||4|

चोट लगे दूँ रोय मैं,तू भी तो दे रोय|
अन्तर बोलो है कहाँ,समझाये तो कोय||5||

उजले रंग औ' मन का,ग्राहक सब संसार|
स्नेह भाव हिय में रखो,चोखा यह व्यापार||6|३

'रा' द्योतक है अग्नि का,'म' शीतल वारि धाम|
अगर संतुलन चाहिए,जपिए निशदिन राम||7||

राम नाम पूंजी बड़ी,रखो इसे संभाल|
केवल जपो न राम को,लो जीवन में ढाल||8||

✍हेमा तिवारी भट्ट✍

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 1
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
Hema Tiwari Bhatt
Posts 49
Total Views 946
लिखना,पढ़ना और पढ़ाना अच्छा लगता है, खुद से खुद का ही बतियाना अच्छा लगता है, राग,द्वेष न घृृणा,कपट हो मन में किसी के, दिल में ऐसे ख्वाब सजाना अच्छा लगता है

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia