कुछ दोहे (माँ)

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- दोहे

प्यार लिखा हर पृष्ठ पर ,माँ वो खुली किताब
माँ के आँचल की महक, जैसे खिला गुलाब

माँ तो ममता का कभी ,रखती नहीं हिसाब
बेटा हो सकता बुरा ,माँ पर नहीं ख़राब

जब सब सुन्दर लिख रहे,मातृदिवस के नाम
वृद्धाश्रम का फिर यहाँ , बोलो क्या कुछ काम

माँ की जीते जी नही, करते सेवा कर्म
खूब निभाते वो मगर ,मरने पर सब धर्म

साधारण होती नहीं , माँ तो है भगवान
चरणों में तीरथ बसे, गीता यही कुरान
डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

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3 comments
  1. माँ पर बहुत सुंदर दोहे रचे हैं. वाह…….!

    माँ पर हम क्या-क्या लिखें, कम पड़ता है ज्ञान |
    माँ देवी है शक्ति है, माँ सा कौन महान ||

  2. जन्म समय वो ही है बेटी जो मध्य काल में माँ बनती
    सास रुप में कहे बहू से बेटी नहीँ बेटे जन चार