==कुछ तो कीजिए ==

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- कविता

चमन में खिलेंगे गुल भी,
थोड़ा इंतजार तो कीजिए।
कुदरत ने किया श्रृंगार ,
थोड़ा दीदार तो कीजिए।
मानेंगे रूठे यार,
थोड़ी मनुहार तो कीजिए।
उड़ जाएंगे दिलों के गुबार,
थोड़ा सा प्यार तो कीजिए।
छंट जाएंगे गम के बादल,
थोड़ा मुस्कुरा तो दीजिए।
आएंगे सुख के दिन भी,
थोड़ा एतबार तो कीजिए।
चलेगी शीतल सी बयार,
जरा एहसास तो कीजिए।
कल चमन में छाएगी बहार,
आज आप ऐसी ही,
कुछ करामात तो कीजिए।

–रंजना माथुर दिनांक 09/07/2017
(मेरी स्व रचित व मौलिक रचना)
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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