कुछ तो कमी सी है ….

डी. के. निवातिया

रचनाकार- डी. के. निवातिया

विधा- गज़ल/गीतिका

कुछ तो कमी सी है ….

क्यू लगे रुखा सा कुछ तो कमी सी है !
जिंदगी में तेरे बिन, कोई कमी सी है !!

नीरस मन शुष्क तन, सूरत हुई बंजर
फिर भी अधरों पे ढली कुछ नमी सी है !!

थकावट से चूर हूँ पर अभी मैं थका नही
तन में साँसे अभी जरा जरा थमी सी है !!

लहू का दौर कुछ कमतर नजर आता है
कड़क तन में नब्ज लगती अब जमी सी है !!

शोभा तो तुम ही हो इस अहले चमन की
बिन तेरे गुलशन में उदासी लगे रमी सी है !!

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डी. के, निवातियाँ __________@

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डी. के. निवातिया
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नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का ह्रदय से आभारी तथा प्रतिक्रियाओ का आकांक्षी । आप मुझ से जुड़ने एवं मेरे विचारो के लिए ट्वीटर हैंडल @nivatiya_dk पर फॉलो कर सकते है. मेल आई डी. dknivatiya@gmail.com

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