कुंडलिया – 3

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- कुण्डलिया

तब हृदय में लगी चोट,देखा चूरन नोट।
एटीएम की खूबी,या कर्मी का खोट।।
या कर्मी का खोट,हुई बंधु खटिया खडी।
बिन बुलाए ही ये,मुसीबत है आन पडी।
सुन प्रीतम की बात,तरीका निकालिए अब।
ऊर्जित जी निवेदन,मिटेगा ये संकट तब।
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प्रीत हँसी अधर धरले,हृदय में मिलन रीत।
फूल-खुशबू से मिलिए,बनकर तुम मंजीत।।
बनकर तुम मंजीत,खुशियाँ बाँटते चलना।
काँटों बदले फूल,बनकर सदा तू खिलना।
सुन प्रीतम की बात,करनी-भरनी की रीत।
याद सदैव रखना,प्रीत बदले मिले प्रीत।
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हरपल जीभर जी यार,जीवन की सौगात।
वक्त बीत गया गर तो,याद ही मुलाकात।।
याद ही मुलाकात,खुद को कोसते रहिए।
वो पल फिर न आए,दु:ख ही बाद में सहिए।
सुन प्रीतम की बात,मायूसी नहीं है हल।
कर्म नेक कीजिए,खुशी से जी फिर हरपल।
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राधेयश्याम बंगालिया
"प्रीतम"
कृत 👌👌

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