कुंडलिया-3… सुन प्रीतम की बात(3…कुंडलिया….3)

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- कुण्डलिया

सुन प्रीतम की बात…कुंडलिया… छंद
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1-कुंडलिया
सोच समझ फैसला लो,पछतावा न होगा।
व्यर्थ गवाया पल अगर,वो आया न होगा।।
वो आया न होगा,कीजिए कितने प्रयास।
साँप निकल गया तो,लीक पीटो हो उदास।
सुन प्रीतम की बात,पीर बडी दिली-खरोच।
प्रसन्न रहो सदैव, करो हर कार्य तुम सोच।

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2-कुंडलिया
इंसानियत बडी सुनो,इंसान छोटा है।
सुगंध से फूल भावे,नहीं तो टोटा है।।
नहीं तो टोटा है,पिशाच प्रवृत्ति छोडिए।
लाल खून सभी का,भेद-दीवार तोडिए।
सुन प्रीतम की बात,कुकृत्य हैं शैतानियत।
पर खुद समान रहें, जागे तब इंसानियत।
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3-कुंडलिया
कुछ घमंडी सुनें नहीं,गढे नहीं संस्कार।
क्या खट्टी आमी हुए,सुखा डालें अचार।।
सुखा डालें अचार,काहे का घमंड बंधु।
तू स्वयं मैं अपने,तू सिद्ध न मैं हूँ बंधु।
सुन प्रीतम की बात,करना न बात तुम तुच्छ।
विचार सदा भाते,जो निकालते अर्थ कुछ।
……..राधेयश्याम बंगालिया प्रीतम
……..सर्वाधिकार सुरक्षित

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