कुंडलिया छंद……..💝💝💝

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- कुण्डलिया

कारण बिन कार्य संभव,कैसे हो बताओ।
सूर्य निकले धूप होय,वरना छाँव पाओ।।
वरना छाँव पाओ,साधारण है ये बात।
सुना यही आज तक,बिना बादल न बरसात।
सुन"प्रीतम"की बात,अंधभक्ति करो तारण।
एक वस्तु न पैदा,धरती पर बिना कारण।
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खुशी किसी की देखकर,न जलना तू यारा।
दूसरे का सुख अपना,समझे खुदा प्यारा।।
समझे खुदा प्यारा,जलन न रीस करले तू।
सबसे गले मिलकर,मोक्ष प्राप्त करले तू।
सुन"प्रीतम"की बात,खुशी बदले मिले खुशी।
दर्द देकर पर को,भूले से न मिले खुशी।
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●●●●●●●●●●●●●●●●राधेयश्याम बंगालिया
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●प्रीतम●●●●●●

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