कुंडलियां छन्द

Pushp Lata

रचनाकार- Pushp Lata

विधा- कुण्डलिया

कारे बदरा छा गये, छम छम बरसे बूँद
राधा देखे श्याम को , अपनी आँखे मूँद
अपनी आँखे मूँद , भरे वह ठंडी आहें
कलियाँ बनती फूल , सजी हैं मन की राहें
देखा रूप अनूप , निहारे मोहन प्यारे
गये ह्रदय में डूब , गरजते बदरा कारे

पुष्प लता शर्मा

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Pushp Lata
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I am working as Manager Accounts in a Private company and writing is my passion , my hobby, whenever I get time I use to put my thoughts on paper :)
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2 comments
  1. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी …बेह्तरीन अभिव्यक्ति