किस रूप में

Sajoo Chaturvedi

रचनाकार- Sajoo Chaturvedi

विधा- मुक्तक

मानव माथे पड़ी लकीर कभी मिटती नहीं
फकीर माँगे देने से अमीरी घटती नहीं।
प्रभु न जाने किस भेष मे आ जाये द्वार,
दर्शन पा जीवन धन्य कभी नजर झुकती नहीं।।.
सज्जो चतुर्वेदी*****************किस रूप में.

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Sajoo Chaturvedi
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