# किस्सा / सांग – @ महात्मा बुद्ध # अनुक्रमांक – 10 # टेक :- *महाराणी गई छोड़ कंवर नै चाला करगी।*

लोककवि व लोकगायक पं. राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य @ संकलनकर्ता - सन्दीप कौशिक, लोहारी जाटू, भिवानी - हरियाणा |

रचनाकार- लोककवि व लोकगायक पं. राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य @ संकलनकर्ता - सन्दीप कौशिक, लोहारी जाटू, भिवानी - हरियाणा |

विधा- कविता

# किस्सा / सांग @ महात्मा बुद्ध # अनुक्रमांक – 10 # टेक :- *महाराणी गई छोड़ कंवर नै चाला करगी।*

कवि शिरोमणि पंडित राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य जो सूर्यकवि श्री पंडित लख्मीचंद जी प्रणाली के प्रसिद्ध सांगी कवि शिरोमणि पंडित मांगेराम जी के शिष्य है जो जाटू लोहारी (भिवानी) निवासी है | आज मै उनका एक भजन प्रस्तुत कर रहा हु | यह भजन महात्मा बुद्ध के किस्से से है| इस रागनी मे सज्जनों कवि ने 18 ऐसे प्रमाण दिए है जिनको जन्म किसी और ने दिया और उनका पालन पोषण किसी और ने किया है| इस भजन की खास बात यह है जैसे पंडित मांगेराम जी ने निम्नलिखित रागनी मे 6 प्रमाणों को दर्शाया है जिसकी टेक वाली दो लाईन नीचे प्रस्तुत है जो चंद्रहास के किस्से मे वैसे ही इस रागनी मे राजेराम जी ने भी उन 18 प्रमाणों एक कविता के रूप मे दर्शाया है महात्मा बुद्ध के किस्से मे |

"मै सू रूख बिन पात्या का छाह करल्यु तै छाह कोन्या |
उसनै जण दिया मनै पाल्या मै के तेरी माँ कोन्या | "

फिर सुनने मे आया है की पंडित मांगेराम जी ने भी महात्मा बुद्ध का सांग बनाया लेकिन वे इस सांग को किसी कारणवश पूरा नही कर सके या श्रोताओ के बीच मे नहीं ला सके | उसके बाद फिर उन्ही की शिष्य पंडित राजेराम जी ने अपने गुरु से प्रेरित होकर उनके आशीर्वाद और गुरु श्रद्धा के रूप मे उनकी इस अधूरी धार्मिक कथा से भी प्रेरित होकर उन्होंने इस कथा की 36 से 40 रचनाओ की रचना की जो उन्ही मे से एक बीच की रचना इस प्रकार है |

अभिवादन :- जिस किसी भी सज्जन पुरुष को जैसी भी ये कविता लगे वो सज्जन पुरुष comment Box मे comment जरुर करे कृपा करके Like का सहारा न लेकर सिर्फ Comment ही करे |

वार्ता:- सज्जनों | जब महात्मा बुद्ध जिनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था वे 7 दिन के हो जाते है तो तब उनकी माता महामाया का देहांत हो जाता है फिर इस खबर को सुनकर महात्मा बुद्ध के पिता राजा सुद्धोधन बहुत ही व्याकुल हो जाते है उसके बाद फिर मंत्रियो के समझाने से राजा अपने मन मे संतोष कर लेते है फिर राजा सुद्धोधन अपनी छोटी रानी गौतमी के पास जाते है तथा रानी गौतमी को महात्मा बुद्ध की परवरिश के बारे मे क्या और कैसे समझाते है |

जवाब – राजा सुद्धोधन का छोटी रानी गौतमी से |

महाराणी गई छोड़ कँवर नै चाला करगी |
तू पाल गौतमी इसका राम रुखाला करगी || टेक ||

ब्रह्मा बोले शक्ति से नाता जोड़ो शिवजी संग,
दक्ष भूप की बेटी सती बणके आई बामा अंग,
शिवजी का पसीना पड़या जल मै नाटी माई गंग,
शिवजी पुत्र कार्तिक पृथ्वी नै पाल दिया,
देवत्या की कैद छुटी तारकासुर मार दिया,
शिवजी नाट्या सती चाली पिता नै निरादर किया,
सती हवन मै जलकै जी का गाला करगी || 1 ||

तारावती नै अंगद पाल्या मदनावत नै रोहताश
सुनीता नै पर्थु पाल्या समझ लिया बेटा खास
सीता जी नै कुश पाल्या एक दासी धा नै चंद्रहास
गणका नै विदुर पाल्या यशोदा नै कृष्ण
कुंती नै सहदेव नकुल राधे नै पाल्या कर्ण
त्रिशु की राणी नै पाल्या सहस्त्र बाहू अर्जुन
मकड़ी पुरै तार भ्रम का जाला करगी || 2 ||

गौरी नै गणेश पाल्या वो भी गज का रूप करके
शीलवती नै जनक पाल्या शीलध्वज का रूप करके
इन्द्र नै मानधाता पाल्या अनुज का रूप करके
सुरस्ती नै सारस पाल्या दधिची का जाया करके
रोहणी नै तो बुध पाल्या चंद्रमा की छाया करके
प्रदुम्न रति नै पाल्या अपणा पति ब्याहा करके
वा पति का पालन नार पूत की ढाला करगी || 3 ||

मानसिंह नै उस अनिरुद्ध का बणाया सांग
लख्मीचंद नोटंकी मीरा खुद का बणाया सांग
मांगेराम जयमल फत्ता बुद्ध का बणाया सांग
बुद्ध का धर्म जाणै उसकी शुद्ध आत्मा
सारी दुनिया कहती आवै आत्मा परमात्मा
राजेराम कित तै ल्याया टोह्के बुद्ध महात्मा
हियै ज्ञान-प्रकाश मात ज्वाला करगी || 4 ||

रचनाकार :- कवि शिरोमणि पंडित राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य |

संकलनकर्ता :- संदीप शर्मा ( जाटू लोहारी, बवानी खेड़ा, भिवानी-हरियाणा )
सम्पर्क न.:- +91-8818000892 / 7096100892

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