किस्सा / सांग – # गोपीचंद – भरथरी # अनुक्रमांक – 24 # & टेक – कितका कौण फकीर बता बुझै चंद्रावल बाई, भूल गई तू किस तरिया गोपीचंद सै तेरा भाई।।

लोककवि व लोकगायक पं. राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य @ संकलनकर्ता - सन्दीप कौशिक, लोहारी जाटू, भिवानी - हरियाणा |

रचनाकार- लोककवि व लोकगायक पं. राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य @ संकलनकर्ता - सन्दीप कौशिक, लोहारी जाटू, भिवानी - हरियाणा |

विधा- कविता

किस्सा / सांग – # गोपीचंद – भरथरी # अनुक्रमांक – 24 #

वार्ता:- सज्जनों! बांदी की बात सुनके चंद्रवाल बाई आती है गोपीचंद भगमा बाणे मै चंद्रावल को भी नहीं पहचान मे आया तभी चंद्रावल बाई गोपीचंद से कैसे सवाल जवाब करती है और गोपीचंद का कैसे पता पूछती है और कैसे गोपीचंद बताता है।।

जवाब :- चंद्रावल बाई का गोपीचंद से।

टेक:- कितका कौण फकीर बता बुझै चंद्रावल बाई,
भूल गई तू किस तरिया गोपीचंद सै तेरा भाई।।

गोपीचंद के नाना नानी सै कौण बता मेरे स्याहमी,
नानी पानमदे नाना गंर्धफसैन होया सै नामी,
गोपीचंद कै और बतादे कै मामा कै मामी,
मामा विक्रमजीत भरथरी बहाण मैनावती जाणी,
मामी का भी नाम बतादे उनकै ब्याही आई,
मामी पिंगला रतनकौर परी खांडेराव बताई।।

गोपीचंद के दादा दादी कौण होए फरमादे,
दादा पृथ्यू सिंह था म्हारी दादी सै कमलादे
कौण माता कौण पिता मेरे थे उनका नाम बतादे,
पिता पदमसैन मां मैनावती होए गोपीचंद सहजादे,
गोपीचंद नै और बातदे कितणी रानी ब्याही,
गोपीचंद कै सोला राणी 12 कन्या जाई।।

और बता के सन् तारीख थी वार तिथि मेरे ब्याह की,
सन् दसवां नौ चार वार बृहस्पति पंचमी माह की,
कितै आई बरात सवारी थी मेरे ब्याह मै क्या की,
टम टम बग्गी अरथ पालकी डोली थी तेरे ना की,
माचगी धूम कुशल घर घर मैं होए किसतै ब्याह रै सगाई,
ढाक बंगाला के उग्रसैन राजा नै तू परणाई।।

राज कुटुम्ब घर बार तज्या तनै किसनै जोग दिवाया,
जोग दिवाया माता नै मेरी अमर करादी काया,
राजेराम लुहारी आले कौण गुरू तनै पाया,
पाड़े कान मेरे गोरख नै जिसकी अदभूत माया,
गोपीचंद कै पैर पदम और माथै मणी बताई,
राख हटाई माथे की पैर पदम दर्शायी।।

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लोककवि व लोकगायक पं. राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य @ संकलनकर्ता - सन्दीप कौशिक, लोहारी जाटू, भिवानी - हरियाणा |
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संकलनकर्ता :- संदीप शर्मा ( जाटू लोहारी, बवानी खेड़ा, भिवानी-हरियाणा ) सम्पर्क न.:- +91-8818000892 / 7096100892 रचनाकार - लोककवि व लोकगायक पंडित राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य जो सूर्यकवि श्री पंडित लख्मीचंद जी प्रणाली से शिष्य पंडित मांगेराम जी के शिष्य जो जाटू लोहारी (भिवानी) निवासी है |

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