किस्सा / सांग – # चापसिंह – सोमवती # अनुक्रमांक – 28 # & टेक – कई किस्म के नाच बताएं, ना बेरा नाचण आली नै, गावण के घर दूर बावली, देख अवस्था बाली नै। ।

लोककवि व लोकगायक पं. राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य @ संकलनकर्ता - सन्दीप कौशिक, लोहारी जाटू, भिवानी - हरियाणा |

रचनाकार- लोककवि व लोकगायक पं. राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य @ संकलनकर्ता - सन्दीप कौशिक, लोहारी जाटू, भिवानी - हरियाणा |

विधा- कविता

किस्सा / सांग – # चापसिंह – सोमवती # अनुक्रमांक – 28 #

वार्ता:-
सज्जनो| सोमवती की बात सुनके वे नटनीया उसको मना कर देती है क्यूकि वे कहती है कि तुम तो रंगमहलो मे रहने वाली हो तुम कैसे नाच गाना कर सकती हो और फिर वे नटणीयो का मैंन कलाकार उस सोमवती को क्या कहता है |

जवाब:-मैन नट्कलाकार का। रागणी:-28

कई किस्म के नाच बताएं, ना बेरा नाचण आली नै,
गावण के घर दूर बावली, देख अवस्था बाली नै। । टेक।

नटबाजी नटकला बांस पैए तनै डोलणा आवै ना,
दोघड़ धरकै नाचैगी केए गात झोलणा आवै ना,
संगीत कला गन्र्धफ नीति काए भेद खोलणा आवै ना,
साज मै गाणा दंगल के म्हाए तनै बोलणा आवै ना,
के जाणै सुरताल दादरा, ठुमरी गजल क्वाली नै।।

एक सुंदर महल, बगीचा धोरै ना कोए गाम दिखाई दे,
नो दरवाजे दस ढयोडी एक रास्ता आम दिखाई दे,
पांच पच्चीस का कुटम्ब, हूर नाचै सुबह-शाम दिखाई दे,
मैन गेट मै दो झांकी, दुनियां तमाम दिखाई दे,
भीतर-बाहर खबर देणी, एक पहरेदार रूखाली नै।।

एक बाग मै पेड़ समी का तोता मैना बैठे बात करै,
सत्रहा दुश्मन बारहा साथी जिंदगी भर का साथ करै,
आठ पहर के 24 घंटे 64 घड़ी विख्यात करै,
गुलशन बाग छुट्या बुलबुल का कित डेरा दिनरात करै,
सकल जमाना दुश्मन दिखै, बाग खोस लिया माली नै।।

बारहा राशि बारहा महीने, छह ऋतु भी कहलाती है,
बारहा सूर्य तप्या करै, उडै हवा तेज ताती है
लख चैरासी जियाजून, उडै रोज खबर जाती है,
छः राग और तीस रागणी वेद दूनी सब गाती है,
राजेराम रटै जगदम्बे देबी शेरावाली नेै।।

Sponsored
Views 10
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
लोककवि व लोकगायक पं. राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य @ संकलनकर्ता - सन्दीप कौशिक, लोहारी जाटू, भिवानी - हरियाणा |
Posts 21
Total Views 480
संकलनकर्ता :- संदीप शर्मा ( जाटू लोहारी, बवानी खेड़ा, भिवानी-हरियाणा ) सम्पर्क न.:- +91-8818000892 / 7096100892 रचनाकार - लोककवि व लोकगायक पंडित राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य जो सूर्यकवि श्री पंडित लख्मीचंद जी प्रणाली से शिष्य पंडित मांगेराम जी के शिष्य जो जाटू लोहारी (भिवानी) निवासी है |

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia