किसानों की दुर्दशा पर एक तेवरी-

कवि रमेशराज

रचनाकार- कवि रमेशराज

विधा- तेवरी

सरकारी कारण लुटौ खूब कृषक कौ धान
रह गयौ बिना रुपैया, धान कौ हाय बुवैया |
दरवाजे पे कृषक के ठाडौ साहूकार
ब्याज के बदले भैया, खोलि लै जावै गैया |
करें खुदकुशी देश के अब तौ रोज किसान
न कोई धीर धरैया , कर्ज में डूबी नैया |
आलू-गेंहू सड़ गये बेमौसम बरसात
कृषक के दैया-दैया, उड़ि रहे प्राण-पपैया |
छीनौ भूमि किसान से, है सरकारी शोर
कृषक के दुःख पर भैया, सेठ की ताताथैया |
+रमेशराज

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कवि रमेशराज
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परिचय : कवि रमेशराज —————————————————— पूरा नाम-रमेशचन्द्र गुप्त, पिता- लोककवि रामचरन गुप्त, जन्म-15 मार्च 1954, गांव-एसी, जनपद-अलीगढ़,शिक्षा-एम.ए. हिन्दी, एम.ए. भूगोल सम्पादन-तेवरीपक्ष [त्रैमा. ]सम्पादित कृतियां1.अभी जुबां कटी नहीं [ तेवरी-संग्रह ] 2. कबीर जि़न्दा है [ तेवरी-संग्रह]3. इतिहास घायल है [ तेवरी-संग्रह एवम् 20 स्वरचित कृतियाँ | सम्पर्क-9634551630

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