किनारा हो जाऊँगी..

मोनिका भाम्भू कलाना

रचनाकार- मोनिका भाम्भू कलाना

विधा- गज़ल/गीतिका

बाहर का तम दिल के जितना घना नहीं,
डूबी इसमें तो पार हो ही जाऊँगी ।

तुम नहीं जानते मेरी तड़प किसलिए हैं,
जिंदा हूँ मगर ज़िन्दगी के लिए मर जाऊँगी ।

मेरी ख़ामोशी का सबब तुम्हे मालूम नहीं,
मैं मौन होकर कैसे तेरी धड़कन गुंजाऊंगी ।

तू सलामत रहे, तेरी हिम्मत बनी रहे,
मेरा कोई नहीं किसी दिन आवारा हो जाऊँगी ।

कतरा-कतरा बिखरने की आदत है मेरी,
मैं कश्ती हूँ खुद ही किनारा हो जाऊँगी । ।

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मोनिका भाम्भू कलाना
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कभी फुरसत मिले तो पढ़ लेना मुझे, भारी अन्तर्विरोधों के साथ दृढ़ मानसिकता की पहचान हूँ मैं..॥

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