किनारा हो जाऊँगी..

मोनिका भाम्भू कलाना

रचनाकार- मोनिका भाम्भू कलाना

विधा- गज़ल/गीतिका

बाहर का तम दिल के जितना घना नहीं,
डूबी इसमें तो पार हो ही जाऊँगी ।

तुम नहीं जानते मेरी तड़प किसलिए हैं,
जिंदा हूँ मगर ज़िन्दगी के लिए मर जाऊँगी ।

मेरी ख़ामोशी का सबब तुम्हे मालूम नहीं,
मैं मौन होकर कैसे तेरी धड़कन गुंजाऊंगी ।

तू सलामत रहे, तेरी हिम्मत बनी रहे,
मेरा कोई नहीं किसी दिन आवारा हो जाऊँगी ।

कतरा-कतरा बिखरने की आदत है मेरी,
मैं कश्ती हूँ खुद ही किनारा हो जाऊँगी । ।

Views 56
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
मोनिका भाम्भू कलाना
Posts 5
Total Views 561
कभी फुरसत मिले तो पढ़ लेना मुझे, भारी अन्तर्विरोधों के साथ दृढ़ मानसिकता की पहचान हूँ मैं..॥

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia