कितने अरमान दिल में छुपा लाया है

विनोद कुमार दवे

रचनाकार- विनोद कुमार दवे

विधा- गज़ल/गीतिका

कितने अरमान दिल में छुपा लाया हैं,
कोई है शख़्स जो मेरा अपना साया है।
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उसकी कमसिन आँखों ने जब से कहा मुझे पागल,
मेरा दिल-ओ-दिमाग बड़े शौक से पगलाया है।
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वो जब से रूठ गई है मुझसे मैंने ऐसा देखा है,
मेरे गुलशन का फूल-फूल पत्ता-पत्ता कुम्हलाया हैं।
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इतनी नाराजगी मत रख मुझसे मेरे सनम,
दिल भी पूछे मेरा तू अपना है या पराया है।
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नज़र नही हटती मेरी तेरे सुंदर सुंदर चेहरे से,
मैं तो तेरा हो चुका जब तूने गले लगाया है।
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दिल की हर धड़कन पर तेरे इश्क़ का ख़ुमार है,
आँखों के रस्ते से होकर साँसों में तुझे बसाया है।
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तेरे नयनों से मेरे प्यार का रंग कभी न उतरेगा,
तू मेरे रंग में रंगी है जब से तुमको अपनाया है।

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विनोद कुमार दवे
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परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत। मोबाइल=9166280718 ईमेल = davevinod14@gmail.com

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