कितना वो गरीब हुआ करता था

Raj Vig

रचनाकार- Raj Vig

विधा- कविता

गुजरा जब मै उस बस्ती से
जहां वो रहा करता था
रोंगटे मेरे खड़े हो गये
कैसे वो जिया करता था ।

धुंए से भरी झोंपड़ी मे
गिनती का समान हुआ करता था
चूल्हे पे बनी रोटी को
अचार साथ वो खाया करता था ।

ढूंढता हूं उसको हर जगह
जहां वो जाया करता था
न जाने कहां गुम हो गया
दोस्त वो मेरा हुआ करता था ।

दोस्तों की पार्टी को
व्रत है कह कर टाल दिया करता था
रोया था हर दोस्त जब बताया था उसने
कितना वो गरीब हुआ करता था ।।

राज विग

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