कितना बेबस, कितना दीनहीन लाचार

लक्ष्मी सिंह

रचनाकार- लक्ष्मी सिंह

विधा- कविता

🌹🌹🌹🌹🌹
कितना बेबस,कितना दीनहीन लाचार,
सामने कटोरा, गोद में बच्चा बिमार।

उफ,ऐ दाता!कैसी किस्मत की मार,
भाग्य में सिर्फ जिल्लत और तिरस्कार।

नित धृणा भरी दृष्टि,लोगों की दुत्कार,
हाथ जोड़कर बैठे मुश्किल से थकहार।

ना कोई छत सहारा ना कोई घर द्वार,
खुलीआकाश के नीचे जीवन रहे गुजार।

भूखे पेट बेहाल,फटे कपड़े जार-जार,
नम आँखों में दिखती मजबूरी की धार।

झुकते गिड़गिड़ाते,हाथ फैलाते बार-बार,
नितआत्मसम्मानऔर स्वाभिमान को मार।

हे ईश्वर सुन करूणा भरी इनकी पुकार
कटे कलेजा छलनी सुन इनकी चित्कार।
🌹🌹🌹🌹🌹—लक्ष्मी सिंह 💓😊

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 137
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
लक्ष्मी सिंह
Posts 173
Total Views 79.4k
MA B Ed (sanskrit) please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank you for your support.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia