कितना दर्द देती हैं ये यादें,

Yashvardhan Goel

रचनाकार- Yashvardhan Goel

विधा- गज़ल/गीतिका

कितना दर्द देती हैं ये यादें,
जब जाती हैं ये यादें क्यूं आती हैं ये यादें
कभी गुनगुनाकर, कभी मुस्कुराकर,
कुछ छुपा तो कुछ, बयाँ कर जाती हैं ये यादें.

यादें क्यूँ रह जाती हैं यादें
कुछ बातों की यादें, कुछ क़िस्सों की यादें .
किसी के साथ रहकर मुलाक़ातो में कहकर
कुछ ख़त्म तो कुछ शुरू कर जाने की यादें.

ये यादें बस रह जातीं हैं यादें,
ख़ामोश लहर सी मन को छु जातीं हैं ये यादें
शिकन में दें दस्तक उदासी को समझकर,
खयालो को हक़ीकत से जुदा कर जातीँ हैं ये यादें

ये यादें बेकरारी की यादें
ये यादें गुमनामी की यादें,
ये यादें क्यूँ रह जातीं हैं यादें
ये यादें हैं जिन्दगी जो हे जिन्दगी की यादें.
Yashvardhan Goel

Views 28
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Yashvardhan Goel
Posts 30
Total Views 167

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia