काहे को ब्याहे महतारी ?

Dr. Nisha Mathur

रचनाकार- Dr. Nisha Mathur

विधा- कविता

सौंधी माटी की खुश्बू को यूं चाक चाक ढल जाने दो,
छोटी सी कच्ची है गगरिया, तन को तो पक जाने दो।
मधु स्मृतियों के बीच पनपते बचपन को खिल जाने दो,
काहे को ब्याहे महतारी ? मुझे, थोङा तो पढलिख जाने दो….

नादानी के खेल चढी है, बल बुद्दि की बेल नही बढी है,
मां के आंचल की ऋणी है, ममता की मूरत नही गढी है,
तिनका तिनका दाता के अंगने को, हाथों से सजाने दो।
महलों की छोटी सी चिङिया, क्यू फुदक फुदक उङ जाने दो।
काहे को ब्याहे महतारी ? मुझे, थोङा तो पढलिख जाने दो….

कच्ची पगडंडी के सपनों में, वो बरगद की छांव भली है,
इच्छाओं के पंख लगाकर अब, आसमान में उङान भरी है
मेरे दम से दम भरती प्रतिभा को, सूली पे मत चढ जाने दो
अभी अभी तो हुआ सवेरा खिलती धूप तनिक खिल जाने दो।
काहे को ब्याहे महतारी ? मुझे, थोङा तो पढलिख जाने दो…..

कन्यादान की क्या गजब विधि है,कन्या की तो जान चली है,
एक कली की दुखद कहानी, दुल्हन का आंचल ओढ चली है,
पीपल की पाती पे कुमकुम स्हायी को, क्यूं करके बह जाने दो।
चंद्रकला की मधुर चांदनी,धरा पे, थोङी थोङी तो इठलाने दो,
काहे को ब्याहे महतारी ? मुझे, थोङा तो पढलिख जाने दो……

डॉ.निशा माथुर

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पूरा नाम :- डॉ.निशा माथुर वर्तमान/स्थायी पता:-बी-12, सेन कॉलोनी, पावर हाउस रोड, रेलवे स्टेशन, Jaipur302006 फोन नं/वाटस एप नं ई मेल:- 8952874359, mathurnisha1@gmail.com शिक्षा :- एम. ए. लोक प्रशासन & Business Administration from AIIMS जनम :-6 अप्रेल,रूचि -:-Kavya srajan, गायन, नृत्य, पेंटिंग्स -सभी क्षेत्रो मे अवॉर्ड

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