काश हम सदा रहते बच्चा

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- कविता

वो बीता कल कहां गया
ओ बचपन तू लौट के आ
मुझ को उन यादों में बुला।

खेलकूद के कदम घर में रखना
माँ की गोदी में सिर रखना।
माँ का सिर पर हाथ फेरना
अंखियों को निंदिया का घेरना।

सब कुछ ही कितना सुखमय था।
न कोई चिंता न ही भय था।
वो बीता कल कहां गया
ओ बचपन तू लौट के आ
मुझ को उन यादों में बुला।

सैर पे पापा के संग जाना
उछल कूद रस्ते में मचाना
कूदना गिरना चोट लगाना
पापा से पुचकारे जाना

वो सब कुछ था कितना अच्छा
काश हम सदा रहते बच्चा
वो बीता कल कहां गया
ओ बचपन तू लौट के आ
मुझ को उन यादों में बुला।

—-रंजना माथुर दिनांक 10/10/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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