*** काश ये बात होती ****

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- कविता

कल उनसे हमारी मुलाकात होती मन से मन की कोई बात होती काशआज की ये रात कल की सुहानी शुरुआत होती काश उनसे यूँ ही मुलाकात होती
प्यार में प्यार से प्यार की बात होती
हर जन्म में यूँ ही मिलते रहेंगे और
न जाने क्या-क्या बात होती काश हमारी तुम्हारी ये पहली मुलाकात होती
काश लोगों केलिए यह तेरी-मेरी मुहब्बत जमाने की सबसे अनोखी बात होती यदि कल की वो रात हमारी तुम्हारी शादी की पहली सुहागरात होती काश ये भी ना होता तो हमारी तुम्हारी कुछ ऐसी बात होती जो किसी सुहागरात की रात से भी रंगीन वही रात होती और
सुबह की एक अच्छी सुरुआत होती
काश उनसे वह पहली मुलाकात होती ।।

👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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