काश मुझमें भी होता हुनर लाखों कमाने का

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

रचनाकार- लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

विधा- कविता

काश
मुझमें भी होता
बिना खून-पसीना बहाये
एकड़ भर ज़मीन से
लाखों कमाने का हुनर

और बन जाता मैं भी
वो अखबारी कृषक

पर मैं तो बना रहा
बरसों से वही
लुटा-पिटा किसान
जो 4-6 महीने
जी-तोड़कर
खून-पसीना एक कर
रात-दिन मेहनत करता है

और अंत में फिर भी
नहीं बेच पाता है अपनी फसलें
समर्थन मूल्य पर भी

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
बैतूल

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लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
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मध्यप्रदेश में सहायक संचालक...आई आई टी रुड़की से पी एच डी...अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ...पूर्व में 'अदिति कैलाश' उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति....

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