काबिल है हम दोनों के….

Dinesh Sharma

रचनाकार- Dinesh Sharma

विधा- कविता

बेपनाह मोहब्बत कीजिए या
नफ़रत
काबिल है हम दोनों के ऐ मेरे दोस्त,
नजरिया आपका अपना है
विश्वास न तोड़ना ऐ मेरे दोस्त
हमें धोखे से डर लगता है,
मोहब्बत नफरत में बदल जायेगी
नफरत मोहब्बत में,
विश्वास अगर बदल गया धोखे में
ऐ मेरे दोस्त
धोखा नही बदलता फिर विश्वास में,
हम आप पर बेपनाह विश्वास करते है
ऐ मेरे दोस्त,
बस आपको खोने से डर लगता है
धोखे से डर लगता है,
विश्वास न तोड़ना…..

^^^^दिनेश शर्मा^^^^

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Dinesh Sharma
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सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज करना प्यारे दोस्तों। ऍम कॉम , व्यापार, निवास गंगा के चरणों मे हरिद्वार।।

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