*कानहा की लीला *

सरस्वती कुमारी

रचनाकार- सरस्वती कुमारी

विधा- हाइकु

कानहा की मुरली
तान है सुरिली
कर दे नशिली।

कानहा तेरी याद
कर दे आबाद
है ऐसी नाद ।

कानहा छेड़े पनघट
बुलाए यमुना तट
खोले घूँघट ।

कानहा मन के मीत
बढ़ाये हैं प्रीत
कैसी ये रीत ।

कानहा चले गोकुल नगरी
तोड़े गोपीयन की गगरी
मैं तो लाज से मरी।

कानहा चुराये घर-घर माखन
खाये मिल सब सखियन
ताना देत गवालन।

कानहा ने धारण किया गोवर्धन
किया प्रकृति का संरक्षण
हुआ इंद्र का मानमर्दन

कानहा की प्रिया राधा
हर ले सबकी बाधा
रहे न कोई आधा।

कानहा है छलिया
मारे है कालिया
गूँजे गलियाँ।

कानह रचायो रास
करे सब महारास
यही है खास।

कानहा ने दिया गीता-ज्ञान
है यह जीवन का वरदान
हुआ दूर सारा अज्ञान ।

कानहा ने दिया कर्म -फल
किया जीवन सफल
है यही प्रतिफल।

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सरस्वती कुमारी
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सरस्वती कुमारी (शिक्षिका )ईटानगर , पोस्ट -ईटानगर, जिला -पापुमपारे (अरूणाचल प्रदेश ),पिन -791111.
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