काँटों में खिलो फूल-सम, औ दिव्य ओज लो

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- गीत

धोकर के मन की कालिख मुख प्रीति चोज लो
कांटो में खिलो फूल-सम औ दिव्य ओज लो

जिसने भी रक्त चूस सताया है दीन को
धिक्कारो ऐसे जीवन ,उस नर प्रवीण को
भारी है काल सब पर गुरुवाणी रोज लो
कांटो में खिलो फूल-सम औ दिव्य ओज लो

निज राष्ट्र तब सबल है जब ना दीनता छले
गम,भूख ,द्वंद,,चीखों, औ घुटन के सिलसिले
दूर हों समाज से उपाय ऐसे खोज लो
कांटों में खिलो फूल-सम औ दिव्य ओज लो

मनुजता-सुबोध चासनी का पान कीजिए
नेह-रूपमय हृदय ना अब विराम लीजिए
सघन एकता के राग का अमल सरोज लो
कांटों में खिलो फूल-सम औ दिव्य ओज लो

बृजेश कुमार नायक
जागा हिंदुस्तान चाहिए एवं क्रौंच सुऋषि आलोक कृतियों के प्रणेता
06-05-2017
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" कृति का गीत
(परिष्कृत गीत)
चोज=सुभाषित

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र.-285205 मो-9455423376व्हाट्सआप-9956928367 एवं8787045243

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