काँटों को अपनाकर देखें

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

रचनाकार- लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

विधा- गज़ल/गीतिका

आओ फूल खिलाकर देखें
काँटों को अपनाकर देखें

खुली आँख से रातों में अब
सपने नए सजाकर देखें

बड़े दिनों से दर्द सहा है
चलो आज मुस्काकर देखें

रिश्ते नाते दूर हुए सब
फिर परिवार बनाकर देखें

मंजिल की चाहत में गुम थे
जो खोया था पाकर देखें

धन दौलत में डूब गए सब
अहम को आज जलाकर देखें

आँखों में जो कैद हैं मेरे
मोती आज लूटाकर देखें

तेरे आने की आहट है
दुल्हन सा शरमाकर देखें

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

Views 137
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
Posts 66
Total Views 9.8k
मध्यप्रदेश में सहायक संचालक...आई आई टी रुड़की से पी एच डी...अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ...पूर्व में 'अदिति कैलाश' उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति....

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia