* कहने वाले मिले हैं मुझसे *

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गीत

प्रारम्भिक बोल
आज की दुनियां में प्यार की बात
करते हैं लोग दुनियादारी की तरह
पर प्यार करने वालो के लिए यह
बात वियोग की रात से कम नहीं
पर तुम्हारी बात कुछ ओर है ।।
***
कहने वाले मिले हैं मुझसे बहुत
जो कहते है मुझसे आई लव यू
झांके जो उनके अंदर जो दिल के
मैला मिले क्यूं उनका दिल यूं
ना जाने दुनियां वाले क्यूं कहते
उनके दिल को फिर भी दिल क्यूं
प्रीत लगाके मीत बनाके होते है
क्यूं वो दिल से दूर क्यों दुनिया की नज़रों में हो जाते मशहूर
मजबूर दिलवाले हो जाते है ठाले
प्यार वफ़ा की क़ीमत वो क्या जाने
रह जाते हैं वो प्यार से महरूम
प्यार करो तो ऐसा करो यारों
हो जाए सब ग़म दिल जो दूर
प्यार नही है खेल खिलौना
खेल-खेल में तोड़ो जो यारों
प्यार है वो पूजा का फूल
इबादत में दिल की चढ़
फिर न हो कोई भूल
प्यार इबादत है ख़ुदा की
प्यार है अल्लाह का नूर
जगमग करे दिल-घर हो रोशन
प्यार नही है सौदा ओ यारों
जो हम ख़रीदे हाट-बाजारों
प्यार करते हैं हम भी दोनों
पर है हम मजबूर दिल से
दिल को दिल की चाह लगी है
आहे जो भरते रहकर यूं दूर ।।
कहने वाले मिले हैं मुझसे बहुत
जो कहते है मुझसे आई लव यू ।।

👍मधुप बैरागी

Sponsored
Views 14
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
भूरचन्द जयपाल
Posts 383
Total Views 9.6k
मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia