कहते सब नादानी है

कृष्णकांत गुर्जर

रचनाकार- कृष्णकांत गुर्जर

विधा- गज़ल/गीतिका

हम बच्चे है नन्हे नन्हे,हमरी एक कहानी है |
कुछभी करदे हम बचपन मे,कहते सब नादानी है||

माँ बाबा के हम आँगन मै,करते खीचा तानी है|
भाई बहन संग सखा सहेली करते सब शैतानी है||

पढ़ने लिखने शाला जाते,सुन टीचर की वानी है|
अक्षर अक्षर लिख लिखकरके हमने लिखी कहानी है||

हम सब पढते लिखते है तो माँ की वजती ताली है|
दादा दादी हमे प्यार से ,देते सुंदर गाली है||

हम ही बनते वीर सिपाही,हम ही बनते माली है|
डाक्टर बनके दवा करे हम,हम ही बने भिखारी है||

कर्मो का फल मिलता सबको,हम सब ने ये जानी है|
कृष्णा जी ले इस दुनिया मे दो दिन की जिंदगानी है||

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कृष्णकांत गुर्जर
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