कश्मीर हमारा है

रमेश कुमार सिंह 'रुद्र'

रचनाकार- रमेश कुमार सिंह 'रुद्र'

विधा- कविता

सदियों से लहू बहायें हैं
बगिया को खूब सजाये हैं
फैला है आतंक तो क्या
सबको मार भगायें हैं॥

कश्मीर हमारा था पहले भी
हमारा आज रहेगा भी
दूर इसे नहीं कर पायेगा
जोर लगायेगा कितना भी॥

ऐसे कैसे हम जानें देगें
प्राण निछावर कर देगें
दृढ़ संकल्प किये हैं हम
देश से अलग ना होने देगें॥

चिला रहा क्यों पाकिस्तान
कश्मीर मेरा है एक जहान
इसपर आँख दिखायेगा तो
बना देगें तुझे कब्रिस्तान॥

@रमेश कुमार सिंह 'रुद्र'
कान्हपुर कर्मनाशा कैमूर बिहार

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रमेश कुमार सिंह 'रुद्र'
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मैं रमेश कुमार सिंह 'रुद्र' कान्हपुर कर्मनाशा कैमूर बिहार का हूँ मैं शिक्षक के पद पर हाईस्कूल बिहार सरकार मे कार्यरत हूं अभी तक देश के विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से 18 सम्मान प्राप्त कर चुका हूँ। "साहित्य धरोहर" पत्रिका के सह-सम्पादक भी हूँ लेखन -गद्य एवं पद्य दोनों विधा में!!

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