कविता

मंजूषा मन

रचनाकार- मंजूषा मन

विधा- कविता

और दर्द दो

तुम मुझे
और दर्द दो
और ज़ख्म दो
और दो पीड़ा

ये तो तुम्हें लगता है…
कि तुम दर्द दे रहे हो
ज़ख्म दे रहे हो

असल में
हर दर्द के साथ
देते हो मुझे
तुम एक कविता भी…

मंजूषा मन

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मंजूषा मन
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मैं मंजूषा मन, लेखन ही मेरा जीवन है, मन ने जो महसूसा वह लिख दिया। जीवन के खट्टे मीठे और कड़वे अनुभवों का परिणाम है मेरी कविता, मेरा लेखन।

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