कविता

Ravi Sharma

रचनाकार- Ravi Sharma

विधा- कविता

यह कविता लगभग १९ वर्ष की आयु में, जुलाई १९७५ को ट्रैकिंग करते समय, लगभग १०- १२ मिंट के समय में लिखी गई।
आज भी मेरी यह पसंदीदा कविताओं में प्रथम स्थान रखती है।

काश मैं !

काश ! मैं हवा होती
दर्दे दिल की दवा होती
बरसाती समा होता
मैं काली घटा होती ।

हरियाली में पली हुई
मैं भी एक लता होती
गर तारा बन जाती तो
तारों में लापता होती ।

किसी शायर का शे' र होती
किसी कवि की कविता होती
संगीतकार का संगीत होती
कलाकार की अदा होती ।

पर्वतों से बहने वाली
पवित्र नदी गंगा होती
कोयले की खानों में
काश ! मैं हीरा होती ।

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Ravi Sharma
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परिचय- आप एक लेखिका,कवयित्री एवं शिक्षिका हैं। पिछले लगभग ४४ वर्षों से आप मंच पर कवितापाठ करती आ रही हैं। आपके दो काव्य- संग्रह भी प्रकाशित हुए हैं। १. काव्य- किरण ( नव कवियों के लिए )२. काव्य- उमंग ( स्कूली बच्चों के लिए ) इसमें अनेक काव्य- विधाओं में, सरल भाषा में रचनाएँ लिखी गयीं हैं ।अक्सर प्रतिष्ठित संस्थाओं से सम्मान प्राप्ती एवं समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, संग्रहों में रचना प्रकाशन होता है

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