कविता :💝💝मंजिलें💝💝

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- कविता

मंजिलें जुनून से मिलें,शुकून से नहीं।
प्यार दिल से करो तुम,खून से नहीं।
तकदीरों के भरोसे जिंदगी क्या जीना,
इतिहास कर्म से बनता,ऊन से नहीं।
…👌👌👌
चलो पथिक अग्रसर दीवानों की तरह।
जलो शम्मा पर तुम परवानों की तरह।
जग तुम्हें तभी याद रखेगा,सुनलो तुम!
मिटोगे या मिटाओगे दुश्मनों की तरह।
…👌👌👌
बरसात वातावरण स्वच्छ बनाती देखी।
मुलाकात दिलों को सदा मिलाती देखी।
फूल तो कागज़ से भी बनाए जाते हैं,
पर खुशबू असली फूलों से आती देखी।
…👌👌👌
धोखे से तन जीत सकें मन नहीं हम।
पैसे से वाद्ययंत्र मिलते फन नहीं सनम।
गैरों पर भरोसा न करो पैरों पर करो,
गैर देते हैं धोखा पर नहीं देते कदम।
…👌👌👌
अपने भरोसे चला वो मुकाम पा गया।
काँटों से तो फूल भी जख्म खा गया।
सूरत से सीरत का अंदाज़ नहीं लगता,
कोयले की खान से हीरा सिखा गया।
…………राधेयश्याम
…………बंगालिया
…………"प्रीतम"

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