कविता ••💝उमर फैयाज पर्रे..एक शहीद💝

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- कविता

कब तक हत्याएं बर्बरता से होती रहेंगी।
माताएँ कलेजे के टुकडे को रोती रहेंगी।।
कितने उमर फैयाज पर्रे यहाँ मिटाए जाएंगे।
कितने रुहों के सपने अरमान लुटाए जाएंगे।।
हे दिल्ली वालो चेतो,संसद में विचार करो।
समझौते छोडो अब,पाक-कफन तैयार करो।।
आर-पार की लडाई अब तो लडनी ही होगी।
बेलगाम के नाकों नकेल अब डालनी ही होगी।।
अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा ये पाक।
जब तक नहीं हो जाएगा सुनलो जिंदा खाक।।
मारते,तन-अंग काटते और जिंदा तडफाते हैं।
ये सोच रोंगटे खडे और आँसू निकल आते हैं।।
एक वर्ष नहीं हुआ जिसको खुशियाँ मिटा दी।
प्रेरणा युवाओं की थी आतंकियों ने हटा दी।।
शहीद होते,रिश्ते रोते तुम करते सिर्फ समझौते।
नहीं,कुछ और करो,न मिटें माँ लाल इकलौते।।
जब सैनिक भर्ती होता,हर रिश्ते में खुशी बोता।
देश-सुरक्षा वो करे,उसकी सुरक्षा ये देश होता।।
सोचो समझो दिल्ली वालो और फरमान करो।
ये बर्बरता न हो चाहे उल्टा धरती-आसमान करो।।
सीने में सुलगी है जो चिंगारी ज्वालामुखी होने दो।
या मिटेंगे या मिटा देंगे अब आर-पार जंग होने दो।
दो कौडी का आदमी सैनिक को तमाचा मारता है।
हाथ बंधे ऐसे कि लहू का घूँट पी रह जाता है।।
अब हाथ खोलदो,ईंट का जवाब पत्थर से दो बोलदो।
बर्बरता नजर नहीं आएगी कहो,भाव के भाव तोलदो।।
जयहिंद………………..
………….💝•राधेयश्याम "प्रीतम"💝

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