कविता: वो बचपन की यादें

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- कविता

आज फिर याद आई मुझे मेरे गाँव की।
वो बचपन की यादों की वो पीपल की छांव की।।

१.माँ की ममता के आँचल तले,
कितने लाड प्यार से हम थे पले।
दादी सुनाती थी परियों की कहानियाँ,
दादा के कंधे बने थे झूले।
वो बारिश का पानी,वो कागज की नाव की।
आज फिर याद……………….।

२.वो बात-बात पर जिद्द करना,
रूठना,रोना खटिया तले छिपना।
मां का मनाना,लोरियाँ सुना सुलाना,
दोस्तों से लड कट्टी करना।
वो गुल्ली डंडा का खेल,वो कंचा पडाव की।
आज फिर याद……………….।

३.वो गुड्डे गुडियों की शादी रचाना,
गुडिया के रूठने पर उसको मनाना।
मिट्टी के खिलौनों की एक दुनिया बसाना,
याद है मुझे वो बालू के टीले बनाना।
वो बापू के गुस्से पर माँ की ममता की छांव की।
आज फिर याद आई मुझे मेरे गाँव की।
वो बचपन की यादों की वो पीपल की छाँव की।।

Views 1,530
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Radhey shyam Pritam
Posts 150
Total Views 7.4k

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia