कविता: भगवान का पता

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- कविता

हमने लिखना खत चाहा,पर पता आपका पाया नहीं।
हमने पूछा हर किसी से,पर किसी ने बताया नहीं।।

१.हमने पूछा फूलों से,फूल मुस्कुरा दिए।
हमने पूछा तारों से,तारे टिमटिमा दिए।
हमने पूछा चाँद से,चाँद बोला सोचूँगा।
जब सुबह को जागे हम,चाँद नजर आया नहीं।
हमने लिखना खत………………।

२.हमने पूछा नदियों से,नदियां तो बहती रही।
हमने पूछा सागर से,सागर ने कुछ न कही।
हमने पूछा बादल से,बादल बोला सोचूँगा।
बादल कहीं बरस गया,फिर गगन में छाया नहीं।
हमने लिखना खत……………….।

३.हमने पूछा चिडियों से,चिडियां चीं-चीं करने लगी।
हमने पूछा कोयल से,कोयल कूह-कूह करने लगी।
हमने पूछा बुलबुल से,बुलबुल बोली सोचूँगी।
फिर बुलबुल ने गाकर सुनाया,पर समझ आया नहीं।
हमने लिखना खत……………….।

४.मन में फिर एक हूक उठी जैसे कोयल कूक उठी।
मन में फिर प्रकाश हुआ जैसे किरणें फूट उठी।
मन बोला मैं बताता हूँ सुन ले मेरे मीत सभी।
मैं ही हूँ घर उनका कोई और पता बनाया नहीं।
हमने लिखना खत……………….।

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Radhey shyam Pritam
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One comment
  1. भगवान ढूँढने के लिए लोग मंदिर,मस्जिद,गिरजा,गुरुद्वारों में जाते हैं,अन्य धार्मिक स्थलों पर जाते हैं,पूजा-पाठ,कर्म-कान्डों में विशवास करते हैं;किन्तु अन्तर्मन के आइने में झांककर नहीं देखते जहाँ भगवान का निवास है।
    मन को शुद्ध कीजिए।परोपकार कीजिए,जीवजन्तुओं की रक्षा कीजिए,यही सबसे बडी पूजा है,आराधना है।
    भगवान आपकी रक्षा करेंगें।